अनुसूचित क्षेत्र बस्तर संभाग से टोल बूथ हटाने की उठी मांग, टोल बूथ की मनमानी से बस्तर का किसान परेशान, शासकीय बाबू और कांग्रेस के पदाधिकारियों के लिए टोल बूथ फ्री लेकिन किसान के ट्रैक्टर को देना पड़ेगा टोल राशि, पत्रकारों से गुंडागर्दी कर वसूल रहे हैं टोल राशि

जगदलपुर। बस्तर संभाग अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग 30 में दो टोल बूथ के माध्यम से वाहनों से मनमाना वसूली की जा रही है। सड़कों का निर्माण पूरा नहींहोने के बावजूद टोल वसूली जारी है, वहीं दूसरी ओर बस्तर संभाग के अनुसूचित क्षेत्र में टोल बूथ की स्थापना बगैर ग्रामसभा की अनुमति के लगाया जाना स्थानीय ग्रामीणों के लिए महंगा पड़ रहा है। किसानों के ट्रैक्टरों से जबरन टोल बूथसे उगाई किए जाने का सिलसिला जारी है, जिससे बस्तर का किसान परेशान है। इससंबंध में सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के द्वारा जिला प्रशासन से बस्तर संभागमें स्थापित टोल बूथों को अनुसूचित क्षेत्र से हटाने की मांग की जा रही है। यह सर्वविदित है कि बस्तर संभाग का पूरा क्षेत्र पांचवी अनुसूची के प्रभावशाली होने से अनुसूचित क्षेत्र कहलाता है। इस अनुसूचित क्षेत्र में बगैर ग्राम सभा के अनुमति के कोई भी कार्य किया जाना विधि के विरुद्ध है। अनुसूचित क्षेत्र से स्टील प्लांटको वापस लौटना पड़ा है। ऐसी स्थिति में बस्तर संभाग में स्थापित टोल बूथ कीस्थापना किया जाना वह भी बगैर ग्राम सभा की इजाजत के पूरी तरह से विधि के विरुद्ध है। जहां एक तरफ सडक़ों का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है,जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वही इसकी वसूली के लिए अनुसूचित क्षेत्र में पहले ही ठेकेदारों के माध्यम से धड़ल्ले से वसूली जारी है। शासकीय बाबू और कांग्रेस के पदाधिकारियों के लिए टोल बूथ पूरीतरह से फ्री है, लेकिन किसान के लिए टोल बूथ फ्री नहीं है। किसान अपना ट्रैक्टर लेकर जाता है तो उसे टोल चुकाना पड़ता ही है, अन्यथा टोल बूथ ठेकेदार के गुर्गे किसानों से पूरी गुंडागर्दी के साथ टोल राशि वसूल लेतेहैं। यह कैसी विडंबना है कि जिस किसान का ट्रैक्टर कृषि कार्य के लिए पूरीतरह से छूट है, उस किसान को बस्तर जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में टोल राशि चुकाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर पत्रकार को समाचार संकलन के लिए भीटोल राशि अदा करना पड़ रहा है।

टोलबूथ के ठेकेदारों की मनमानी का आलम यह है कि पत्रकारों से गुंडागर्दी कर टोल राशि वसूलने से पीछे नहीं हट रहे। टोल ठेकेदारों से पत्रकारों के यहनिवेदन करने पर कि वे समाचार संकलन के लिए पास के ग्रामीण क्षेत्रों में जारहे हैं, अत: उनसे टोल राशि न लिया जाए लेकिन टोल ठेकेदार बिना पैसे लिएपत्रकारों को जाने ही नहीं देते हैं। यदि कोई पत्रकार ठेकेदारों से बहसकरता है तो वे लोग गुंडागर्दी पर उतर आते हैं। टोल बूथ शहर से दूर होने सेतथा ठेकेदार के 20 गुर्गे वसूली के लिए लगाए गए हैं। जिसके माध्यम सेपत्रकारों से पूरी गुंडागर्दी के साथ टोल राशि वसूल चुके हैं। पत्रकारों सेटोल राशि वसूलने के बाद इन ठेकेदारों के हौसले बुलंद है। इससे नाराज पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक दीपक झा मिलकर इस संबंध में पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करवाया। जिस पर पुलिस अधीक्षक बस्तर दीपक झा ने तत्काल अधीनस्थ अधिकारियों को इसकी जानकारीलेने एवं समुचित व्यवस्था देने के संबंध में निर्देश दिया है।

सर्वआदिवासी समाज बस्तर संभाग के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता प्रकाश ठाकुर ने बताया कि बस्तर संभागके अनुसूचित क्षेत्र से टोल बूथ को तत्काल हटाने के लिए उन्होंने जिला प्रशासन को यह अवगत करवाया गया है। अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति केबगैर लगाए गए टोल बूथ विधि के विरुद्ध है। अनुसूचित क्षेत्र में टोल बूथ से वसूलीकरने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर ऐसे बैरिकेट्स को लांग कर जाना आदिवासी समाज को भी महंगा पड़ रहा है। जिला प्रशासन की ओर से अब तक इसदिशा में कोई पहल नहीं किया गया है।

राकेश पांडे

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Dinesh KG (EDITOR)

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