भारतमाला परियोजना से बस्तर के पर्यटन को लगेंगे पंख, बस्तर के भावी विकास को मिलेगा बढ़ावा – बाफना

जगदलपुर। हालही के दिनों में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने भारतमाला परियोजना के तहत् ग्रीन फील्ड इकोनाॅमिक काॅरीडोर रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे परियोजना की मंजूरी दी है। लेकिन यह एक्सप्रेस-वे बस्तर संभाग की दहलीज पर तो आ गया, किन्तु संभाग के मुख्यालय को ही इसमें शामिल नहीं किया गया। जगदलपुर विधानसभा के पूर्व विधायक संतोष बाफना ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी एवं सड़क परिवहन मंत्रालय के केन्द्रीय सचिव को पत्र लिखकर कोण्डागाॅव से होकर गुजरने वाले एक्सप्रेस-वे को कोण्डागाॅव से विस्तार करते हुए जगदलपुर नगरनार मार्ग को भी सम्मिलित किये जाने का निवेदन किया है।

पूर्व विधायक के द्वारा अपने लिखे हुए पत्र में कहा गया है कि, भारतमाला परियोजना के तहत् केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा समूचे देश में 44 इकोनाॅमिक काॅरीडोर बनाए जाने के साथ ही इस परिेयोजना में 22 एक्सप्रेस-वे भी बनाये जाने हैं। जिसमें आपकी अगुवाई में ही इसी परियोजना में केन्द्रीय सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ प्रदेश को सम्मिलित कर रायपुर – विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे को मंजुरी दी गई हैं। विकास की दृष्टि से केन्द्रीय सरकार द्वारा उठाए गए इस सकारात्मक कदम की जितनी खुशी आज छत्तीसगढ़ प्रदेश को मिले इस एक्सप्रेस-वे की है, निश्चित रूप से प्रदेश की जनता इस सौगात के लिए सदैव केन्द्रीय सरकार की आभारी रहेगी।

पूर्व विधायक बाफना ने इस पत्र का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए आगे लिखा है कि, इस पत्र का एकमात्र मेरा उद्देश्य केवल और केवल यातायात के अल्प संसाधनों की कमी से जूझ रहे बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कराना है। बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर की जनता आज भी यातायात के लिए पूर्ण रूप से सड़क मार्ग पर ही निर्भर है। आजादी के 7 दशक बीतने के बाद भी बस्तर संभाग के पिछड़ेपन के सबसे प्रमुख कारणों में से एक यातायात के अल्प साधन ही हैं। जिसकी वजह से आजादी के इतने दशक बाद भी जगदलपुर आज तक समुचित यातायात के साधनों के लिए तरसने को मजबूर है। केन्द्रीय सरकार ने इससे पूर्व भी बस्तर संभाग में आवागमन के संसाधनों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 30 रायपुर से जगदलपुर तक यात्री परिवहन की बढ़ती अधिकता को देखते हुए ही सिंगल लेन सड़क के चौड़ीकरण व उन्नयन कार्य की स्वीकृति दी थी। किन्तु समय की मांग को देखते हुए बस्तर संभाग की आवश्यकता फोर लेन किए जाने की थी। लेकिन चौड़ीकरण और उन्नयन कार्य स्वीकृत होने मात्र से ऐसा प्रतीत होने लगा है कि रायपुर से जगदलपुर मार्ग को फोर लेन किये जाने का सपना अधूरा ही रह गया।

बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर के विकास की यात्रा आपके द्वारा भारतमाला परियोजना के तहत् नवीन स्वीकृत रायपुर – विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे निश्चित रूप से मिल का पत्थर साबित हो सकता है। यह परियोजना रायपुर-दुर्ग बाईपास से शुरू होकर कुरूद, धमतरी, कांकेर, कोण्डागाॅव, कोरापुट, नवरंगपुर, तुम्बिगुरा, सब्बवाराम होकर विशाखापट्टनम पोर्ट तक बनना है। किन्तु विडम्बना ही है कि, बस्तर संभाग के कांकेर व कोण्डागाॅव जिले को ही मात्र इस परियोजना में शामिल किया गया, किन्तु बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर को नहीं। जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस ग्रीन फील्ड इकोनाॅमिक काॅरीडोर रायपुर – विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे में जगदलपुर नगरनार मार्ग को शामिल न करने के कारण एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट के आसपास इस प्रकार की सुविधाओं की कमी के असर से देश के बड़े काॅर्पोरेट घरानों और निवेशक समूहों का मोह भंग हो सकता है। जिसका साफ तौर पर असर सरकार की उद्योग नीति पर भी पड़ेगा। साथ ही साथ इसका सबसे बड़ा झटका एक बार फिर बस्तर की जनता को लगेगा, जिन्हें भरोसा है कि यहाॅ उद्योग इकाईयों के आने से उनके खाली हाथों को रोजगार नसीब होगा।

बस्तर संभाग के यातायात की वर्षों पूर्व समस्या का निवारण मात्र आपके द्वारा स्वीकृत रायपुर – विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे ही है लेकिन यह तभी संभव होगा जब इस परियोजना में कोण्डागाॅव व्हाया जगदलपुर से नगरनार मार्ग को भी इसमें सम्मिलित किया जाये। इसका सबसे बड़ा लाभ यह भी होगा कि, वर्तमान में एनएमडीसी द्वारा 20 हजार करोड़ से भी अधिक की लागत से तीन मिलियन टन क्षमता का इस्पात संयंत्र जगदलपुर (नगरनार) में स्थापित किया जा रहा है। यदि यातायात की दृष्टि से संसाधनों की समुचित व्यवस्था होगी तो इसका सीधा लाभ एनएमडीसी स्टील प्लांट में प्रोडक्शन शुरू होते हुए आसपास के क्षेत्र में और भी सहायक उद्योग लगने से सरकार की उद्योग नीति को भी बढ़ावा मिलेगा एवं बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर का क्षेत्र जो कि आदिवासी बाहुल्य अंचल भी है उसका सीधा लाभ यहाॅ की जनता को होगा। केन्द्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में कोण्डागाॅव व्हाया जगदलपुर से नगरनार मार्ग सम्मिलित हो जाने से एनएमडीसी नगरनार इस्पात संयंत्र के आसपास अन्य निवेशकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित कर बस्तर के विकास के लिए एक नई दिशा बनाने में सफल होंगें। साथ ही इसके किनारे-किनारे छोटे बड़े उद्योग, पेट्राॅल पम्प, रेस्टोरेंट भी स्थापित होंगे। बस्तर संभाग के किसानों के कृषि, बागवानी और दुग्ध उत्पादों को तेजी से बड़े शहरों में स्थानांतरित करने से जनता की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी और इस क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से बस्तर में अनेकों ऐसे स्थल हैं जो अद्वितीय हैं, यातायात के मामले में सुधार होने से पर्यटन को भी पंख लगेंगे।

पत्र के अंत में पूर्व विधायक संतोष बाफना ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन जयराम गडकरी एवं सड़क परिवहन मंत्रालय के केन्द्रीय सचिव से जगदलपुर नगरनार मार्ग को शामिल करने का निवेदन करते हुए कहा है कि, बस्तर संभाग को पिछड़ेपन की स्थिति से बाहर निकालने के लिए आपके द्वारा की कई एक पहल समूचे बस्तर के भविष्य को संवार सकती है। बस्तर के भावी विकास को बढ़ावा देने के लिए आपसे बारम्बार निवेदन है कि, आप सहानुभूतिपूर्वक भारतमाला परियोजना के तहत् नवीन स्वीकृत रायपुर – विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे में कोण्डागाॅव व्हाया जगदलपुर से नगरनार मार्ग को भी सम्मिलित किए जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें।

Dinesh KG (EDITOR)

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