छत्तीसगढ़साहित्य सृजन

वीरों का वंदन : कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की कविता में गूँजी देशभक्ति की अनूठी गूँज

तिरंगे में लिपटी भावनाएँ – कवयित्री सुषमा ने शब्दों में गढ़ा शहीदों का सम्मान

अमर जवानों के लिए रायपुर से उठी भावनाओं की सशक्त कलम

घनाक्षरी छंद में सुषमा प्रेम पटेल ने रचा वीरों का अमर गीत

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के पूर्व राजधानी रायपुर की कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल ने अपनी रचना “वीरों का वंदन” के माध्यम से देश के अमर शहीदों और सरहद पर तैनात सैनिकों को स्नेहिल शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित की है।


“सुषमा के स्नेहिल सृजन”

छंद-देव घनाक्षरी

“वीरों का वंदन”

अमर वीरों का गान, भारती का होता मान,
गूँजे हर दिशा-दिशा,
धरती नभ उपवन।

बलिदानी प्रहरी ये, रहते अडिग सदा,
आँच नहीं आने देते,
भारत माता के वसन।

कसम माटी की खाते, रणभूमि कूद देते,
पीछे न कदम हटे,
सुरक्षा हो धरा गगन।

अमर शहीद होते, कफन तिरंगा ओढ़,
माँ की रक्षा हेतु दृढ़,
अर्पण है यह तन। (1)

सीना तान कर खड़े, सरहद पर अड़े,
भारतीय जवानों को,
करें कोटि-कोटि नमन।

बर्फीली चोटी हो या, धधकता सूर्य जब,
हर हाल में हैं टिके,
चाहे तेज बहे पवन।

आँखों में है देश प्रेम, दिल में भी ज्वाला लिए,
अदम्य साहस से ही,
करते रक्षा जन-जन।

झुकते न कभी वीर, कठिनाई धरें धीर,
‘सुषमा’ तिरंगा उड़े,
प्रफुल्लित है चमन। (2)

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल,रायपुर छ.ग.
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घनाक्षरी छंद में रची गई इस कविता में उन्होंने वीर जवानों के साहस, त्याग और मातृभूमि की रक्षा के लिए अडिग संकल्प का जीवंत चित्रण किया है। कविता की पंक्तियाँ – “अमर शहीद होते, कफन तिरंगा ओढ़” और “आँखों में है देश प्रेम, दिल में भी ज्वाला लिए” – हर पाठक के मन में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करती हैं।

कवयित्री ने कहा कि यह कविता मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों को समर्पित है, जो बर्फीली चोटियों से लेकर धधकते रेगिस्तानों तक, हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा में तत्पर रहते हैं।
उनकी यह काव्यांजलि न केवल वीर सपूतों का सम्मान है, बल्कि नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देने वाला संदेश भी है।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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