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दण्डकारण्य में माओवादियों की कमर टूटी, वरिष्ठ केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता ने छोड़ी हिंसा की राह, किया आत्मसमर्पण 

बस्तर में माओवादी ढांचे की जड़ें हिलीं, शीर्ष नेता सुजाता ने हथियार डाले

आईजी सुन्दरराज पी. की चेतावनी : माओवादी नेतृत्व के पास हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं

पुलिस, सुरक्षा बलों और समस्त एजेंसियों के समन्वित प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक वामपंथी उग्रवाद का पूर्ण अंत नहीं हो जाता

जगदलपुर। प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन की केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता @ कल्पना ने आज तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया। यह कदम दण्डकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के लिए एक गंभीर झटका माना जा रहा है। सुजाता माओवादी संगठन की वरिष्ठतम नेताओं में से एक थी। उनका आत्मसमर्पण हाल के दिनों में माओवादी पंक्तियों में गहराते आत्मविश्वास संकट को उजागर करता है।

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम बस्तर पुलिस द्वारा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, आसूचना एजेंसियों और अंतर्राज्यीय सीमा क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा इकाइयों के साथ बेहतर समन्वय में चलाए गए लगातार और आक्रामक अभियानों का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन संयुक्त प्रयासों ने माओवादी ढांचे को गहरी चोट पहुँचाई है और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में उनके कमांड तंत्र को बाधित किया है।

हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज और अन्य नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादियों को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इनमें कई वरिष्ठ नेताओं का निष्प्रभावी होना, बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटकों की बरामदगी तथा उनके पुराने ठिकानों का ध्वस्तीकरण शामिल है। इन सतत अभियानों ने माओवादियों को पुनर्गठन और विस्तार का अवसर नहीं दिया, जिससे उनके शीर्ष नेतृत्व का भी संगठन के भविष्य पर विश्वास डगमगा गया है।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री सुन्दरराज पाट्टलिंगम ने कहा कि सुजाता का आत्मसमर्पण बस्तर में लागू की जा रही मजबूत और बहुआयामी माओवादी विरोधी रणनीति को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सक्रिय पुलिसिंग प्रयासों के साथ-साथ सरकार का विकास और कल्याण पर विशेष ध्यान, माओवादियों के प्रभाव को कमजोर करने और उनके जनाधार को खत्म करने में निर्णायक रहा है।

प्रतिबंधित एवं निषिद्ध भाकपा (माओवादी) संगठन की वरिष्ठ केंद्रीय समिति सदस्य सुजाता दण्डकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के दक्षिण उप-ज़ोनल ब्यूरो की प्रभारी थी। उस पर ₹40 लाख का इनाम घोषित था तथा बस्तर रेंज के विभिन्न जिलों में दर्ज 72 से अधिक मामलों में वह वांटेड थी।

सुजाता के मुख्यधारा में लौटने और शांति, गरिमा तथा आशा के मार्ग को अपनाने के इस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए आईजीपी बस्तर रेंज ने प्रतिबंधित संगठन के शेष कैडर और नेताओं से अपील की है कि वे हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल हों, ताकि बस्तर के लोगों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण किया जा सके।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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