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वन विभाग का नवाचार : बस्तर की इमली चटनी को राष्ट्रीय पहचान दिलाएंगी सुकमा की महिलाएं

रायपुर। बस्तर में इमली की चटनी को काफी पसंद किया जाता है। यह चटनी खाने में बहुत स्वादिष्ठ होती है। सुकमा जिले में स्थानीय संसाधनों के उपयोग और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में बस्तर की प्रसिद्ध इमली से तैयार “इमली चटनी” को वन धन विकास केंद्र सुकमा के माध्यम से आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जा रहा है। यह उत्पाद स्थानीय वनोपज का मूल्य संवर्धन करने के साथ-साथ बस्तर की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास है।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा किए गए अनुसंधान और गुणवत्ता मानकों के आधार पर यह चटनी तैयार की जा रही है। वन धन विकास केंद्र से जुड़ी नवा बिहान महिला स्व सहायता समूह की महिलाएँ इस चटनी के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिलाओं को निर्माण प्रक्रिया, स्वच्छता मानक, वैज्ञानिक विधि तथा आधुनिक पैकेजिंग संबंधी विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।

प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और समूह की महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। बस्तर संभाग में इमली की अधिकता को देखते हुए यह पहल स्थानीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इमली चटनी के उत्पादन से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलेगा। वन विभाग की यह पहल महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और आजीविका संवर्धन की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

आने वाले समय में यह उत्पाद न केवल छत्तीसगढ़ के घरों का स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि सुकमा की महिलाओं की मेहनत और सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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