सहकारी सप्ताह के दूसरे दिन जिला सहकारी विकास समिति, एफपीओ और पैक्स की भूमिका पर मंथन, किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

जैविक खेती, मिलेट्स उत्पादन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वय से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हुई विस्तृत चर्चा

जगदलपुर। सहकारी सप्ताह के अंतर्गत निर्धारित कार्यक्रमों की श्रृंखला में दूसरे दिन जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर के सभा कक्ष में “जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) का महत्व एवं सदस्यों की आय बढ़ाने में एफपीओ एवं पैक्स की भूमिका” विषय पर परिचर्चा एवं व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जिले की समस्त प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) एवं वृहत्ताकार बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (LAMPS) के प्राधिकृत अधिकारी एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सहकारी संस्थाओं के मध्य समन्वय स्थापित कर कृषकों की आय वृद्धि, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन तथा सहकारिता आधारित समग्र ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित, जगदलपुर के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) की भूमिका, उद्देश्य एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सहकारिता की विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (FPO) एवं प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियाँ (PACS) किसानों को संगठित कर सामूहिक क्रय-विक्रय, प्रसंस्करण, भंडारण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन की मजबूत व्यवस्था विकसित कर सकती हैं, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
उन्होंने सभी प्राधिकृत अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों, सहकारी योजनाओं एवं एफपीओ गतिविधियों से जोड़ने के लिए सक्रिय पहल करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बैंक के उपाध्यक्ष श्रीनिवास मिश्रा ने एफपीओ के माध्यम से कृषि नवाचार, मिलेट्स आधारित खेती और मूल्य संवर्धन के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आज मोटे अनाज (मिलेट्स) की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मांग किसानों के लिए आय बढ़ाने का बड़ा अवसर है।
उन्होंने परंपरागत कृषि ज्ञान को संरक्षित रखने के साथ-साथ जैविक खाद के अधिकाधिक उपयोग पर बल दिया और कहा कि वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अधिक उत्पादक और लाभकारी खेती की ओर बढ़ सकते हैं। उनका कहना था कि जैविक एवं वैज्ञानिक कृषि का संतुलित समन्वय ही भविष्य की टिकाऊ और समृद्ध कृषि व्यवस्था का आधार बनेगा।
उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने उपस्थित अधिकारियों से अपने-अपने समिति क्षेत्रों में किसानों को जैविक खेती, उन्नत कृषि तकनीकों, मिलेट्स उत्पादन एवं एफपीओ गतिविधियों से जोड़ने हेतु सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान लैम्प्स जगदलपुर के प्राधिकृत अधिकारी योगेश ठाकुर ने अपने विचार रखते हुए कहा कि किसानों को केवल धान उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मौसम आधारित बहुफसलीय कृषि प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने दलहन, तिलहन, मिलेट्स, सब्जी एवं बागवानी जैसी विविध फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि किसानों को वर्षभर आय के विभिन्न स्रोत उपलब्ध हो सकें और कृषि अधिक टिकाऊ एवं लाभकारी बन सके।
परिचर्चा के दौरान उपस्थित प्राधिकृत अधिकारियों एवं अन्य अधिकारियों ने भी अपने अनुभव एवं सुझाव साझा किए। सभी ने एकमत होकर कहा कि यदि सहकारी संस्थाएँ, एफपीओ एवं पैक्स समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को आधुनिक तकनीक, जैविक कृषि, मूल्य संवर्धन एवं बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़ा जाए, तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा और गति मिल सकती है।
कार्यक्रम का संचालन विवेक पाण्डे, जिला सहकारी शिक्षा प्रशिक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी संघ द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का समापन किसानों की आय दोगुनी करने, सहकारिता को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा जिले में टिकाऊ, वैज्ञानिक एवं जैविक कृषि को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ।
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