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काव्य की सुरमयी शाम : सद्भावना साहित्य संस्थान की प्रतियोगिता में सुषमा प्रेम पटेल और आर. डी. अहिरवार संयुक्त विजेता

सद्भावना साहित्य संस्थान की काव्य संध्या संपन्न, प्रतियोगिता में सुषमा प्रेम पटेल एवं आर. डी. अहिरवार रहे अव्वल

रायपुर। सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा 5 जुलाई 2026 को वृंदावन हॉल, रायपुर में लाहोटी मित्र मंडल, नवरंग काव्य मंच एवं पारस हैंडलूम के सहयोग से भव्य काव्य संध्या एवं काव्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अंचल के प्रतिष्ठित एवं युवा कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को देर रात तक काव्य रस में सराबोर रखा।

संस्थान के अध्यक्ष योगेश शर्मा “योगी” ने बताया कि सद्भावना साहित्य संस्थान का प्रमुख उद्देश्य युवा रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराना तथा साहित्यिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार चितरंजन कर थे, जबकि अध्यक्षता माणिक विश्वकर्मा “नवरंग” ने की। कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन युवा कवि आरव शुक्ला ने किया।

इस अवसर पर “एक अपनी, एक किसी और की” विषय पर काव्य प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को अपनी एक मौलिक रचना तथा किसी अन्य प्रतिष्ठित कवि की एक रचना प्रस्तुत करनी थी। निर्णायक मंडल ने उत्कृष्ट प्रस्तुति के आधार पर सुषमा पटेल एवं आर. डी. अहिरवार को विजेता घोषित किया। संस्था द्वारा दोनों विजेताओं को स्मृति-चिह्न, प्रशस्ति-पत्र, शॉल एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि चितरंजन कर ने अपने उद्बोधन में कहा कि “जब तक मनुष्य है, तब तक संवेदना है।” उन्होंने अपनी भावपूर्ण पंक्तियाँ सुनाईं—

“मैं एक बूँद हूँ सागर की, मुझमें सागर लहराता है,
मैं एक धूलि-कण धरती का, मुझमें यह विश्व समाता है।”

काव्य पाठ के दौरान विभिन्न कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।

सुषमा प्रेम पटेल ने हास्य-व्यंग्य से भरपूर रचना “सुबह-सुबह सास-बहू की मीठी नोक-झोंक” प्रस्तुत कर वातावरण को आनंदमय बना दिया।

आर. डी. अहिरवार ने अपने मुक्तकों में कहा—

“अकारण ही बड़प्पन का कोई रस घोल देते हैं,
बड़ों के बीच में अक्सर बड़ा कुछ बोल देते हैं।
अब आया है समझ हमको मुहब्बत क्यों नहीं मिलती,
जहाँ हो साधना चुप्पी वहाँ मुँह खोल देते हैं।”

योगेश शर्मा ‘योगी’ ने अपनी रचना में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप का सुंदर चित्रण किया—

“श्रीकृष्ण का भी क्या खूब दर्शन है,
अधरों पर मुरली, हाथ में सुदर्शन है।”

युवा कवि आरव शुक्ला ने अपनी संवेदनशील पंक्तियों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया—

“इन सितारों से न पूछो चाँदनी का मर्म तुम,
चाँद ही ये जानता है चाँदनी क्या चीज़ है।
खुदकुशी का मन करे तो तुम पिता से पूछना,
खुदकुशी क्या चीज़ है और ज़िंदगी क्या चीज़ है।”

संस्थान के अध्यक्ष योगेश शर्मा ‘योगी’ ने बताया कि भारी वर्षा के बावजूद वृंदावन हॉल पूरी तरह भरा रहा और रात्रि लगभग 9 बजे तक श्रोताओं ने काव्य संध्या का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि कवियों ने अपनी मौलिक रचनाओं के साथ-साथ महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, रवीन्द्रनाथ टैगोर, बशीर बद्र, जॉन एलिया सहित अनेक महान साहित्यकारों की रचनाओं का पाठ कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया तथा नई पीढ़ी को उनके साहित्य से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का समापन साहित्य, संवेदना और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रति समर्पण के भाव के साथ हुआ।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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