‘तुपकी’ की सलामी और भक्ति के माहौल में संपन्न हुआ बस्तर का प्रसिद्ध ‘गोंचा पर्व’, मंदिर लौटे भगवान जगन्नाथ

मंत्री, सांसद, विधायक ने पूजा अर्चना कर मांगा क्षेत्र की सुख समृद्धि का आशीर्वाद
जगदलपुर। बस्तर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का प्रतीक प्रसिद्ध ‘गोंचा पर्व’ शुक्रवार को ‘बाहुड़ा गोंचा’ यानी भगवान जगन्नाथ जी की वापसी यात्रा की पावन रस्म अत्यंत श्रद्धा एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और भगवान बलभद्र जी विशाल रथ पर सवार होकर जनकपुरी (गुंडिचा मंदिर) से पुनः अपने मुख्य मंदिर की ओर रवाना हुए।
इस पावन अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद श्री महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, चित्रकोट विधायक श्री विनायक गोयल और अन्य जनप्रतिनिधि विशेष रूप से शामिल हुए। सभी जनप्रतिनिधियों ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में भाग लिया, पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना की। रथ यात्रा के दौरान बस्तर की वह अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा देखने को मिली, जो पूरे देश में सिर्फ यहीं निभाई जाती है। रास्ते में श्रद्धालुओं ने बांस से बनी विशेष नाल ‘तुपकी’ में पेंग (मलकांगनी) के बीजों को भरकर भगवान जगन्नाथ को सलामी दी। तुपकी से निकलने वाली मधुर आवाज और श्रद्धालुओं के उत्साह ने पूरे जगदलपुर शहर को एक अलग ही उमंग और भक्ति रंग में रंग दिया। बाहुड़ा गोंचा की इस भव्य परंपरा के पूर्ण होने के साथ ही बस्तर के इस अनूठे लोक पर्व का विधिवत समापन हुआ।
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