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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बस्तर की इकलौती सामान्य विधानसभा सीट जगदलपुर के लिए दो जैनियों का भविष्य दांव पर लग गया है। मतदाताओं में छायी उदासी से ऊंट किस करवट बैठेगा का पूर्वानुमान मुश्किल लग रहा है।
भाजपा उम्मीदवार संतोष बाफना ने मतदाताओं से सघन जनसंपर्क का अभियान छेड़ दिया है। संतोष बाफना पूर्व में नगरपालिका के अध्यक्ष के साथ ही दो मर्तबा विधायक समेत वर्तमान में राज्य पर्यटन मंडल के अध्यक्ष पद को सुशोभित कर रहे हैं। इस नाते उनके पास समर्थकों एवं कार्यकार्ताओं की लम्बी-चौड़ी फौज है। टिकिट के प्रति वे काफी आशान्वित थे। इसीलिए साल भर पूर्व से ही उन्होंने अपनी अंदरूनी तैयारियां, मसलन कार्यकत्र्ताओं से मेल-मिलाप एवं मतदाताओं के दुख-सुख में शरीक होने की कसरतें शुरू कर दी थीं। प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह की स्वच्छ व पारदर्शी छवि तथा जनकल्याणकारी कार्य संतोष बाफना की नैया पार लगाने में अत्यधिक सहायक सिद्ध होंगे। बाफना, नगरपालिका, विधायकी एवं पर्यटन मंडल में सक्रियता जुझारूपन एवं ईमानदार कर्तव्य निर्वहन से जन सामान्य में विश्वनीय पहचान बना चुके हैं। निर्विवाद आचरण के धनी बाफना को जनता से यह कहने की जरूरत नहीं है कि उन्होंने क्या-क्या किया, क्योंकि उनके कार्यकाल के जनकल्याण कार्य स्वयं प्रमाण हैं, जो जगजाहिर हैं। सारी खूबियों के बावजूद यह आशंका भी निर्मूल नहीं है कि टिकिट से वंचित प्रतिद्वंदियों ने, जिस तीखे तेवरों का प्रदर्शन किया था, उससे उन्हें भीतरघात तथा अंर्तकलह का निश्चित ही सामना करना पड़ेगा।
मिलनसार, हंसमुख एवं विनम्रता की तमाम खूबियों से परिपूर्ण कांगे्रस प्रत्याशी रेखचंद जैन ठोस संकल्प, दम-खम एवं जोश खरोश से चुनावी दंगल में कूदे हैं। छात्र जीवन से ही सक्रिय राजनीति में संलग्र रहे रेखचंद जैन बस्तर चेम्बर ऑफ कामर्स के महामंत्री का दायित्व बखूबी निभा चुके हैं, इस नाते व्यापारी वोट अपनी झोली में बटोरकर डालने में उन्हें काफी मदद मिलेगी। रेखचंद जैन के लिए सोने में सुहागा यह है कि उनके लघु भ्राता रमेश जैन भी एक प्रतिष्ठित समाज सेवक तो हैं ही साथ ही जिले की खेल गतिविधियों को भी आगे बढ़ाने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनकी साख का भी लाभ रेखचंद जैन के खाते में घनात्मक साबित होगा। भाजपा का भले ही हिंदू वोटों पर कब्जा हो, किंतु ईसाई एवं मुस्लिम समुदाय के अधिकांश वोट कांग्रेस के पक्ष में ही पड़ेंगे, इस सत्यता में कोई दो राय नहीं है। भाजपा की दोषपूर्ण नीतियां, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, जर्जर सडक़ें, महारानी अस्पताल की दुर्दशा एवं बस्तर में पसरते नक्सलवाद जैसे महत्वपूर्ण एवं ज्वलंत मुद्दों को लेकर जैन मतदाताओं के पास जा रहे हैं। अतीत में युवा छात्र नेतृत्व के रूप में छात्र संघ के अध्यक्ष रह चुके जैन ने अपने राजनीतिक सफर में पार्षद से लेकर बस्तर जिला युवा कांग्रेस, शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री होते हुए पी.सी.सी. सदस्य का पदभार कुशाग्रतापूर्वक सम्भाल चुके है। भाजपा की जनविरोधी नीतियों का जैन ने जिला कांग्रेस कमेटी के बैनर तले अनेकों जनांदोलनों द्वारा काफी मुखर विरोध किया, जिसके एवज में उन्हें जेल यात्रा भी करनी पड़ी।
विकास को दोनों ही दलों ने प्रचार का मुख्य मुद्दा बनाया है। भाजपा का जहां एक ओर दावा है कि उसने बस्तर में विकास की गंगा बहाई है, तो कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा शासन में विकास कम, भ्रष्टाचार सिर से पांव तक फला-फूला है। क्षेत्र की बजाए भाजपा नेताओं का ज्यादा आर्थिक विकास हुआ है।