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रायपुर। ईव्हीएम मशीन और व्हीव्हीपेट मशीन के उपयोग से निर्वाचन प्रणाली में अत्याधिक पारदर्शिता आयी है। यह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईव्हीएम) और वोटर वेरिफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (व्हीव्हीपेट) का मैनुअल का तृतीय संस्करण है, जो शतप्रतिशत खरा है। जिसने मतपेटी का स्थान ले लिया है, निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण भाग है। इसके लिए ईव्हीएम सह व्हीव्हीपेट मशीन की उपयोगिता सुनिश्चित की गई है। ईव्हीएम की दो यूनिटें होती है एक कंट्रोल यूनिट (सीयू) और वैलेट यूनिट (व्हीयू) और दोनों को जोड़ने के लिए एक केबल होती है। एक वैलेट यूनिट 16 अभ्यर्थियों तक को शामिल कर लेती है। समय-समय पर इसका विकास हुआ है यह और अधिक विश्वसनीय एवं सुदृढ़ हुई है। प्रत्येक मतदाता बिना भय, डर, सहजता एवं सरलता से अपने मताधिकार का उपयोग करें।
व्हीव्हीपेट मशीन ईव्हीएम से जुड़ी एक स्वतंत्र प्रणाली है जो मतदाताओ को यह सत्यापित करने की सुविधा देती है कि उनके द्वारा डाले गए मत उसी को गए है। जब एक वोट डाला जाता है, व्हीव्हीपेट प्रिन्टर पर एक पर्ची मुद्रित होती है, जिसमें निर्वाचन लड़ने वाले प्रत्याशी का सीरियल नंबर, नाम और चिन्ह होता है और यह पर्ची 7 सेकंड के लिए एक पारदर्शी खिड़की के माध्यम से दिखाई देती है। उसके बाद यह मुद्रित पर्ची स्वचालित रूप से कट जाती है और व्हीव्हीपेट के सीलबंद ड्रॉप बॉक्स में गिर जाती है। व्हीव्हीपेट एक 22.5 वोल्ट की एक पावर पैक (बैटरी) से चलती है।
बतादें कि निर्वाचन आयोग ने वर्ष 1977 मे पहली बार इसकी संकल्पना तैयार की और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ई.सी.आई.एल) हैदराबाद को इसका डिजाईन तैयार करने और इसे विकसित करने का कार्य सौंपा। जिसे अगस्त 1980 को राजनीतिक दलों के समक्ष निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदर्शित किया गया। सहमति बनने के बाद पहली बार ईव्हीएम का उपयोग मई 1982 में केरल में एक उप-निर्वाचन में किया गया। बाद में सभी नियम-प्रक्रिया और सहमति के साथ वर्ष 1998 में इनका प्रयोग तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान एवं दिल्ली में 25 विधान सभा निर्वाचन में किया गया। वर्ष 1999 में इसका विस्तार कर 45 संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में किया गया तथा बाद में फरवरी 2000 में हरियाणा विधानसभा निर्वाचन में 45 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में इसका उपयोग किया गया। इसके बाद के निर्वाचनों में यह सिलसिला चलता रहा। वर्ष 2004 में हुए लोकसभा आम निर्वाचन के सभी संसदीय क्षेत्रों में ईव्हीएम का उपयोग हुआ।