छत्तीसगढ़रायपुरसोशल

छत्तीसगढ़ की काव्य परंपरा का उत्सव : राजीव लोचन साहित्य संस्था द्वारा किया गया भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन

Advertisement
Ro. No.: 13171/10

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साहित्य और संस्कृति के प्रति प्रेम को समर्पित एक ऐतिहासिक शाम का आयोजन किया गया। राजीव लोचन साहित्य संस्था द्वारा तेलीबांधा तालाब स्थित पार्क पैलेस में भव्य काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रदेश के ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों और कवियों ने अपनी उपस्थिति से इसे ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के पूजन और वंदन के साथ हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार एवं राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त डॉ. राजेन्द्र पाटकर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में श्री रामेश्वर शर्मा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री राजेश चौहान मौजूद रहे। आयोजन का सफल संयोजन ऋषिकुमार साव द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन श्री राजा राम रसिक एवं श्रीमती सुषमा पटेल ने किया।

प्रमुख साहित्यकारों की उपस्थिति

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रख्यात साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रमुख साहित्यकारों में कुमार जगदलवी, लक्ष्मीकांत, मन्नूलाल यादव, डॉ. इन्द्रदेव यदु, अनिल साव, अनिता झा, ऋतुराज साहू, अनिल राय, आरव शुक्ल, विवेक, मंजुषा अग्रवाल, निवेदिता वर्मा, दुष्यंत कुमार साहू, यशवंत यदु, लालाराम साहू, उत्तम देवहरे, कल्याणी तिवारी, अमृतांश शुक्ला, राजेन्द्र पाण्डेय, सुमन बाजपेयी, मीता अग्रवाल, डॉ. भारती अग्रवाल, मीनेश कुमार साहू, भारती यादव एवं शारदेन्दु झा जैसे प्रतिष्ठित रचनाकार शामिल रहे।

साहित्यिक समृद्धि का अनूठा संगम

गोष्ठी के दौरान कवियों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ कर साहित्यिक समृद्धि में योगदान दिया। उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने पूरे आयोजन को सराहा और इसे साहित्य जगत के लिए प्रेरणादायक बताया।

संस्था की अनूठी पहल

इस अवसर पर राजीव लोचन साहित्य संस्था के प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की गई। संस्था ने यह सिद्ध किया कि साहित्य समाज का दर्पण है और इसके संरक्षण व संवर्धन के लिए इस प्रकार के आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है।

विशेष प्रस्तुति: ‘सुषमा के स्नेहिल सृजन’

इस आयोजन में कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल द्वारा प्रस्तुत मनहरण घनाक्षरी विधा में लिखित कविता ‘माता चंद्रघंटा’ ने सभी को भाव-विभोर कर दिया। उनकी रचना ने भक्तिरस से ओतप्रोत कर वातावरण को अलौकिक बना दिया।

भवानी माँ चंद्रघंटा, युद्ध मुद्रा सिंहारूढ़ा, शोभित कमल श्वेत, हार पहनाइए।

भोग प्रिय पंचामृत, केशर व दूध घृत, पीले फूल गुलाब से, माता को रिझाइए।

उपासना करें भक्त, पहन के पीत वस्त्र, नमस्तस्यै नमो नमः, मैया गुण गाइए।

‘सुषमा’ से नैन तीन, सुखद है पलछिन, हस्त दस वर देती, आँचल फैलाइए।

भविष्य में भी जारी रहेगा यह साहित्यिक सफर

आयोजन के अंत में यह संकल्प लिया गया कि राजीव लोचन साहित्य संस्था भविष्य में भी इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन करती रहेगी, जिससे छत्तीसगढ़ के साहित्य प्रेमियों को एक उत्कृष्ट मंच मिलता रहे।

यह आयोजन साहित्य की समृद्धि और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में याद किया जाएगा।

Back to top button
error: Content is protected !!