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राम भक्ति से सराबोर ‘मानस के तुलसी’ बनी श्रेष्ठ रचना, ‘सुषमा प्रेम पटेल’ को मिला गौरव

नव सृजन काल में चमकी रामकथा की रचनाशक्ति, सुषमा प्रेम पटेल को मिला पहला स्थान

नारायण साहित्य शाला में गूंजी तुलसी वाणी, सुषमा प्रेम पटेल की रचना रही अव्वल

“मानस के तुलसी” को मिला श्रेष्ठ रचना का सम्मान, सुषमा प्रेम पटेल बनीं साहित्य मंच की शान

रायपुर। नारायण साहित्य शाला (उत्तर प्रदेश) द्वारा आयोजित “नव सृजन काल” साहित्यिक प्रतियोगिता में साहित्य साधना की उच्चतम मिसाल पेश करते हुए रायपुर की सुप्रसिद्ध कवियत्री ‘सुषमा प्रेम पटेल’ को उनकी अनुपम रचना “मानस के तुलसी” के लिए श्रेष्ठ रचनाकार घोषित किया गया।

इस प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभावान साहित्यकारों ने भाग लिया, लेकिन सुषमा जी की मनहरण घनाक्षरी शैली में रचित रचना ने सभी का हृदय जीत लिया। रचना में श्रीराम के दिव्य गुणों का भावपूर्ण वर्णन, केवट प्रसंग की कोमल अनुभूति, नल-नील जैसे पौराणिक पात्रों का जीवंत चित्रण और तुलसीदास जी को आदर्श कवि के रूप में स्थापित करना – यह सभी तत्व इसे एक अद्वितीय साहित्यिक कृति बनाते हैं।

प्रतियोगिता के समीक्षक श्री कैलाश परमार (शाजापुर, मध्यप्रदेश) ने रचना की समीक्षा करते हुए कहा कि यह रचना रामचरितमानस की आध्यात्मिक भावधारा को आधुनिक संवेदना से जोड़ने का सफल प्रयास है, जो भाव, छंद और शिल्प के स्तर पर अत्यंत सराहनीय है।

पटल के समस्त साहित्यप्रेमियों ने सुषमा प्रेम पटेल जी को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं कवियत्री सुषमा प्रेम पटेल ने भी सभी का आभार व्यक्त किया।
नारायण साहित्य शाला ने इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य को जीवंत रखने और नव रचनाकारों को मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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