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रथयात्रा महापर्व : कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की भावपूर्ण कविता ‘रथयात्रा’ ने बिखेरा भक्ति रस

कविता में झलकी श्रीजगन्नाथ की दिव्यता, पाठकों को भावविभोर कर गई 'रथयात्रा'

रथयात्रा के पावन पर्व पर सुषमा प्रेम पटेल की भक्ति रस से ओत-प्रोत काव्यांजलि

रायपुर। भगवान श्रीजगन्नाथ की पावन रथयात्रा के शुभ अवसर पर रायपुर (छत्तीसगढ़) की कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की भावपूर्ण काव्य रचना ‘रथयात्रा’ श्रद्धालुओं और साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस रचना में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की दिव्य रथयात्रा, सनातन संस्कृति और भक्तिभाव का अत्यंत सुंदर एवं सहज चित्रण किया गया है।

कविता में रथयात्रा की भव्यता, पुरी धाम की आध्यात्मिक आभा, भगवान के दिव्य रथों का स्वरूप तथा श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को काव्यात्मक शैली में अभिव्यक्त किया गया है। प्रस्तुत है कवयित्री की यह रचना –

”सुषमा के स्नेहिल सृजन”

रथयात्रा

उमड़ा जन सैलाब है, क्षेत्र पुरी शुभ धाम।
महापर्व श्री नाथ का, जगन्नाथ प्रिय नाम।।

दोनों भाई संग में, बहन विराजीं साथ।
दर्शन से मिलती खुशी, नित्य नवाएँ माथ।।

रथयात्रा यह पर्व है, मंगलमय शुभ काम।
संग सुभद्रा साथ में, श्री बलदाऊ नाम।।

ईश महाप्रभु जी सदा, हरते सारे क्लेश।
तन पावन शुभ आचरण, सबके सम्मुख पेश।।

जगन्नाथ भगवान जी, गरुड़ध्वज रथ संग।
सोलह पहिए सज गये, लाल पीत शुभ रंग।।

तालध्वज है बढ़ रहा, चौदह पहिए साथ।
बलदाऊ जी खुश बहुत, लाल-हरा प्रिय नाथ।।

बारह पहियों से चले, रथ है काला लाल।
दर्पदलन में शोभती, पहन सुभद्रा माल।।

’सुषमा’ सुंदर भोग है, चढ़ता अन्न प्रसाद।
शंख-घंट रथ गूँजतें, अनुपम है यह स्वाद।।

_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की यह रचना केवल एक कविता नहीं, बल्कि भगवान श्रीजगन्नाथ के प्रति श्रद्धा, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति समर्पण की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। सरल, सरस और भावप्रधान शैली में लिखी गई यह कविता पाठकों को भक्ति रस में सराबोर कर देती है तथा रथयात्रा महापर्व के आध्यात्मिक महत्व का सहज बोध कराती है।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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