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तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा सर्वोपरि : केदार कश्यप की पहल पर संग्रहण केंद्रों में मजबूत हुई अग्नि सुरक्षा व्यवस्था

वन मंत्री के निर्देश पर चिरचारी डिपो में विशेष प्रशिक्षण, आगजनी की रोकथाम और वन संपदा संरक्षण पर जोर

जगदलपुर। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा तथा वन संपदा के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशभर के तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले के चिरचारी फॉरेस्ट डिपो स्थित तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्र में वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की टीम ने वन अमले को आग लगने की संभावित परिस्थितियों, बचाव उपायों और त्वरित नियंत्रण की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। एसडीओ, रेंजर, डिप्टी रेंजर सहित लगभग 35 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने प्रशिक्षण में भाग लेकर व्यावहारिक अभ्यास भी किया।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े लाखों वनवासी परिवारों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सभी संग्रहण केंद्रों में अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा अधिकारियों-कर्मचारियों को नियमित रूप से प्रशिक्षण देकर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा जाए।

प्रशिक्षण के दौरान सूखे तेंदूपत्तों की ज्वलनशील प्रकृति को देखते हुए विशेष सावधानियों पर जोर दिया गया। संग्रहण केंद्रों में धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध, अग्निशामक उपकरणों की नियमित जांच, विद्युत व्यवस्थाओं का निरीक्षण तथा ज्वलनशील सामग्री को समय-समय पर हटाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

अग्निशमन विशेषज्ञों ने “PASS पद्धति” के माध्यम से अग्निशामक यंत्रों के उपयोग का प्रदर्शन किया तथा फायर बीटर से छोटी आग पर नियंत्रण की तकनीक भी बताई। अधिकारियों को आपातकालीन स्थिति में डायल-112, फायर स्टेशन और वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना देने की प्रक्रिया से भी अवगत कराया गया।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तेंदूपत्ता सीजन के दौरान प्रदेश के अन्य संग्रहण केंद्रों में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे आगजनी की घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ वन संपदा और तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत किया जा सके।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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