कविता, विचार और संवेदनाओं से सजी यादगार काव्य संध्या : सद्भावना साहित्य संस्थान के आयोजन में गूंजे प्रेम, समाज और मानवीय संवेदनाओं के स्वर

कवियों की ओजस्वी प्रस्तुतियों ने बांधा समां, साहित्य प्रेमियों ने लिया काव्य रस का भरपूर आनंद
रायपुर। शहर के प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा वृंदावन हॉल रायपुर में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस साहित्यिक समारोह में अंचल के ख्याति प्राप्त कवियों और रचनाकारों ने अपनी ओजस्वी, भावनात्मक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुषमा प्रेम पटेल ने की, जबकि मंच संचालन विवेक भट्ट द्वारा प्रभावी अंदाज में किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सुरेन्द्र रावल रहे।
काव्य संध्या में कवियों ने प्रेम, समाज, रिश्तों, मानवीय संवेदनाओं और वर्तमान समय की विसंगतियों पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही लूटी।
योगेश शर्मा योगी ने अपनी पंक्तियों – “शिकायतें बहुत है खुलाशा कौन करे, मुस्कुरा देते हैं तमाशा कौन करे…” से सामाजिक विडंबनाओं पर कटाक्ष किया।
सत्येन्द्र तिवारी सकुति ने प्रेम और भ्रम की भावनाओं को शब्द देते हुए श्रोताओं को भावुक कर दिया। वहीं राजेश जैन राही ने रिश्तों में बढ़ती दूरी और अकेलेपन को अपनी कविता में अभिव्यक्त किया।
कल्याणी तिवारी ने विश्व में बढ़ती विषमता और अशांति पर चिंता व्यक्त करते हुए मानवता को आईना दिखाया, जबकि विघासागर जनप्रिय ने प्रेम और मानवता का संदेश देते हुए कहा – “नफ़रत तो हर कोई बोता है, तू प्रेम की फसल उगा कर देख…”
राजेन्द्र रायपुरी ने मौसम की रिमझिम फुहारों का सुंदर चित्र खींचा, वहीं मोहम्मद यूशा के शेरों ने महफिल में अलग ही रंग जमा दिया।
कार्यक्रम में रुनाली चक्रवर्ती, गोपा शर्मा, उरकुर कर, कुमार जगदलवी, दृष्टि टंडन, मजाहिर, छबिलाल सोनी और महेंद्र ठाकुर की प्रस्तुतियों पर भी श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और काव्य रस का भरपूर आनंद लिया।
समारोह में वरिष्ठ रचनाकार यशवंत कुमार चतुर्वेदी की मार्मिक पंक्तियों – “अर्ध नग्न रिश्तों की टोली, खींच रही लक्ष्मण-रेखाएं…” ने आधुनिक समाज में टूटते रिश्तों और बदलती मर्यादाओं पर गहरा चिंतन प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान अध्यक्ष योगेश शर्मा योगी ने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ना और समाज में संवेदनशीलता एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना है। साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया।
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