छत्तीसगढ़साहित्य सृजन

शब्दों में सजी श्रद्धा, भावों में बसी गुरुभक्ति : गुरु महिमा को समर्पित रचना, कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की काव्यांजलि ने मोहा हृदय

छंदों में झलकती है गुरु के प्रति अटूट आस्था और समर्पण

रायपुर। श्रावण मास की पावन बेला में, राजधानी रायपुर की प्रसिद्ध कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की भावप्रवण रचना “गुरु वंदना” साहित्यिक जगत में सराही जा रही है। ‘सुषमा के स्नेहिल सृजन’ शृंखला की यह रचना गुरु-शिष्य परंपरा को समर्पित है, जिसमें उन्होंने गुरु की महिमा को छंदबद्ध शैली में अत्यंत मधुर और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है।

”सुषमा के स्नेहिल सृजन”

गुरु वंदना

प्रथम नमन है आपको, गुरुवर ! आप महान।
अतुल ज्ञान-भंडार से, दिये सुधोपम ज्ञान।।

शीश झुका वंदन करूँ, लूँ मैं गुरु का नाम।
वाणी मधुरिम मुख झरे, करूँ सदा शुभ काम।।

गुरु महिमा गायन करूँ, गुण-अवगुण पहचान।
कथनी-करनी एक हो, तभी मिले सम्मान।।

जीवन के हर द्वार पर, किए आप उपकार।
सतगुरु की महिमा अनंत, अनुभव के भंडार।।

’सुषमा’-सी शुभ लेखनी, लिखती सदा बहार।
रंग भरे नित लेखनी, छंद विधा अनुसार।।

शब्द-सुमन अर्पण करूँ, गुरु गाथा शुभ काज।
भाव-शिल्प ‘सुषमा’ गढ़े, सजे शीर्ष सरताज।।

दीपक बनकर जो जले, देता वही प्रकाश।
मर्म वही पहचानता, रखता जो विश्वास।।

शब्द सजे भावों सहित, हो शीर्षक आधीन।
रचना रचती स्नेह से, सृजन कार्य में लीन।।

गुरुवर! से मुझको मिला, छंद-सृजन सह गान।
जिससे मिलता है मुझे, कृतियों में सम्मान।।

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल , रायपुर (छ.ग.)

सुषमा जी की लेखनी श्रद्धा, भाव और कला का अद्भुत संगम है, जिसमें गुरु को दीपक की उपमा देते हुए ज्ञान, विश्वास और मार्गदर्शन की अनंत छाया को दर्शाया गया है।

उनकी रचना की पंक्तियाँ –
“दीपक बनकर जो जले, देता वही प्रकाश।
मर्म वही पहचानता, रखता जो विश्वास।।“ – पाठकों के मन को छू जाती हैं।

रचना में जीवन के हर मोड़ पर गुरु द्वारा किए गए “अनुभवमूलक उपकारों” को भावभीनी अभिव्यक्ति दी गई है। इस अवसर पर साहित्य प्रेमियों ने सुषमा जी को “भावों की शिल्पकार” बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएँ न केवल काव्य की गरिमा बढ़ाती हैं, बल्कि पाठकों को आत्मचिंतन और प्रेरणा भी देती हैं।

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की यह गुरु-वंदना रचना न केवल एक साहित्यिक कृति है, बल्कि आध्यात्मिक संदेश से भी परिपूर्ण है, जो गुरु की कृपा और ज्ञान से जीवन में उजास फैलाने की प्रेरणा देती है।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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