
रेडी टू ईट का कार्य महिलाओं को सौंपने के निर्णय पर बाफना ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
स्व सहायता समूह की मार्तशक्तियां फिर से सफलता की ईबारत लिखेंगी – बाफना
आरंभिक परियोजना के लिए चिन्हांकित 6 जिलों के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों को शामिल करने की बाफना की मांग
बस्तर संभाग के सभी जिलों में रेडी टू ईट का कार्य वापस मिलने का महिलाओं को बेसब्री से इंतजार – बाफना
जगदलपुर। प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा नारी सशक्तिकरण के हित में पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) निर्माण का कार्य पुनः महिला स्व सहायता समूहों को सौंपने हेतु लिए गए निर्णय पर जगदलपुर विधानसभा के पूर्व विधायक संतोष बाफना ने इस फैसले को अभिनंदनीय बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया।
बता दें कि, वर्ष 2009 से लगभग 25 हजार से अधिक स्व सहायता समूह की अनेकों महिलाएं पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) निर्माण एवं वितरण कार्य से जुड़ी हुई थीं और उन्हें इसका लाभ भी मिलता था। प्रदेश की महिलाएं जो स्वाभिमान के साथ अपने पैरों पर खड़ीं थीं, परंतु राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद तत्कालीन कॉग्रेस की सरकार ने उन सभी को बेरोजगार करते हुए उनके हांथ से काम छीनकर केवल कमीशनखोरी के लिए निजी ठेकेदारों को रेडी टू ईट का कार्य सौंप दिया। विपक्ष में रहते हुए उस दौरान भाजपा ने कॉग्रेस सरकार के इस महिला विरोधी फैसले का पुरजोर विरोध किया और कई बार तत्कालीन कॉग्रेस की सरकार को कठघरे में खड़ा करने का काम किया। तो वहीं वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में समूह की महिलाओं से वादा किया था कि, प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद उन्हीं निजी ठेकेदारों से रेडी टू ईट का काम छीनकर पुनः महिलाओं को पूरक पोषण आहार के निर्माण व वितरण का कार्य सौंपा जायेगा।
अभी हाल ही में आरंभिक परियोजना के तहत् प्रथम चरण में रेडी टू ईट का कार्य पुनः समूह की महिलाओं को सौंपने हेतु मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने इसके लिए प्रदेश के 6 जिलों को चिन्हांकित किया है जिसमें रायगढ़ जिले से इस परियोजना की शुरूआत कर 10 महिला स्व-सहायता समूहों को अनुबंध पत्र भी वितरित किये गये हैं। पूर्व विधायक बाफना ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्राचार कर चिन्हांकित 6 जिलों के साथ बस्तर संभाग के सभी जिलों को भी इस आरंभिक परियोजना में शामिल करने की बात कही है। और कहा है कि, बस्तर संभाग में स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं भी कार्य वापस मिलने के इंतजार में हैं। इन महिलाओं के द्वारा रेडी टू ईट निर्माण हेतु लाखों रूपये खर्च कर यूनिट लगाए थे, जो कि तत्कालीन कॉग्रेस सरकार के महिला विरोधी फैसले के बाद से बेकार पड़े हुए हैं। समूह की महिलाओं पर बैंकों में लाखों रूपये का लोन बकाया है और आरंभिक परियोजना में बस्तर संभाग के जिलों के शामिल नहीं होने से यहॉ की महिलाएं काफी चिंतित हैं।
पूर्व विधायक बाफना ने बताया है कि, हर साल स्व सहायता समूह एवं आंगनबाड़ी से जुड़ी अनेकों बहनें मुझे राखी बांधती हैं और एक भाई होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि, उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुॅचाऊं। ताकि बस्तर संभाग के सभी जिलों को भी इस आरंभिक परियोजना में शामिल कर यहॉ की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत् आदिवासी अंचल बस्तर की महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है। एवं बच्चों को पोषण युक्त आहार प्रदान कर राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में स्व सहायता समूह की मातृशक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर अपनी सफलता की नई ईबारत भी लिख सकती हैं।
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