छत्तीसगढ़ जनसंपर्कजगदलपुरबस्तर संभागसोशल

परंपरा, श्रद्धा और संस्कृति का संगम : देवी दंतेश्वरी के चरणों से शुरू हुआ लोक आस्था का महापर्व, पाट-जात्रा से गूंजा बस्तर, 75 दिनों तक चलेगा आस्था और परंपरा का विश्व प्रसिद्ध पर्व ‘बस्तर-दशहरा’

75 दिवसीय परंपरा का पर्व शुरू, बस्तर दशहरा की आस्था में डूबा पूरा अंचल

हरियाली अमावस्या पर मां दंतेश्वरी के दरबार में उमड़ा जनसैलाब, जनप्रतिनिधियों सहित मांझी-चालकी, पुजारी-गायता और जिला प्रशासन रहा उपस्थित

जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध और 600 वर्षों से अधिक पुराना ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व गुरुवार को हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर परंपरागत पाट जात्रा पूजा विधान के साथ आरंभ हो गया। बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में संपन्न हुए इस शुभारंभिक अनुष्ठान में परंपरा, श्रद्धा और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला।

इस अवसर पर बस्तर सांसद एवं दशहरा समिति अध्यक्ष महेश कश्यप, जगदलपुर विधायक किरण देव, महापौर संजय पाण्डे, कलेक्टर हरिस एस, अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल सहित मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी-गायता, नाईक-पाईक, पटेल, सेवादार एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पाट जात्रा में रथ निर्माण हेतु पूजनीय औजारों – ठुरलू खोटला सहित अन्य उपकरणों की पूजा कर पर्व का पहला विधान पूरा किया गया। इसी के साथ बस्तर की परंपरा, संस्कृति और आध्यात्म का अनूठा संगम बिखेरता यह महापर्व प्रारंभ हो गया है, जो लगभग 75 दिनों तक श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

प्रमुख तिथियाँ – पूजा विधानों का शृंगार

  • 5 सितम्बर (शुक्रवार) – डेरी गड़ाई
  • 21 सितम्बर (रविवार) – काछनगादी
  • 22 सितम्बर (सोमवार) – कलश स्थापना
  • 23 सितम्बर (मंगलवार) – जोगी बिठाई
  • 24 से 29 सितम्बर – नवरात्रि पूजा व रथ परिक्रमा
  • 29 सितम्बर (सोमवार) – बेल पूजा
  • 30 सितम्बर (मंगलवार) – महाअष्टमी व निशा जात्रा
  • 1 अक्टूबर (बुधवार) – कुंवारी पूजा व मावली परघाव
  • 2 अक्टूबर (गुरुवार) – भीतर रैनी
  • 3 अक्टूबर (शुक्रवार) – बाहर रैनी
  • 4 अक्टूबर (शनिवार) – काछन जात्रा व मुरिया दरबार
  • 5 अक्टूबर (रविवार) – कुटुम्ब जात्रा (ग्राम देवताओं की विदाई)
  • 7 अक्टूबर (मंगलवार) – मावली माता की डोली विदाई (समापन)

बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, जनजातीय संस्कृति, आस्था और विरासत का जीवंत प्रतीक है, जो पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान और परंपरा के लिए जाना जाता है।

📢 हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें!

ताज़ा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज़ और विश्वसनीय अपडेट्स सीधे WhatsApp पर पाएं। अभी फॉलो करें 👉

📲 WhatsApp चैनल फॉलो करें

दिनेश के.जी. (संपादक)

सिर्फ खबरें लगाना हमारा मक़सद नहीं, कोशिश रहती है कि पाठकों के सरोकार की खबरें न छूटें..
Back to top button
error: Content is protected !!