बस्तर की संस्कृति का साक्षात्कार करेंगे गृहमंत्री अमित शाह : रियासत से लोकतंत्र तक – मुरिया दरबार की परंपरा में जुड़ेगा नया अध्याय, दिल्ली में सांसद महेश कश्यप ने सौंपा निमंत्रण

सांसद महेश कश्यप दशहरा समिति के मांझी-चालकी सदस्य एवं मेंबरिन ने गृहमंत्री को सौंपी माई दंतेश्वरी की छवि
नई दिल्ली। बस्तर सांसद महेश कश्यप ने आज नई दिल्ली में देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह से सौजन्य भेंट की और उन्हें बस्तर की आस्था, परंपरा और गौरव के प्रतीक बस्तर दशहरा में सम्मिलित होने हेतु औपचारिक निमंत्रण सौंपा। इस अवसर पर दशहरा समिति के मांझी-चालकी सदस्य एवं मेंबरिन भी उपस्थित रहे। सांसद महेश कश्यप ने गृहमंत्री जी को माँ दंतेश्वरी की पवित्र छवि भी भेंट की।

सांसद कश्यप ने बताया कि मुरिया दरबार की परंपरा रियासत काल से चली आ रही है, जहाँ गाँवों के मांझी-चालकी और मेंबरिन अपनी समस्याएँ राजा के समक्ष रखते थे। आज़ादी के बाद यही परंपरा लोकतांत्रिक स्वरूप में जनप्रतिनिधियों और शीर्ष नेतृत्व तक पहुँच रही है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बस्तर के लिए यह ऐतिहासिक और गौरवशाली क्षण होगा जब देश के यशस्वी गृहमंत्री अमित शाह पहली बार मुरिया दरबार में सम्मिलित होकर न केवल जनभावनाओं को सुनेंगे बल्कि बस्तर की अनूठी संस्कृति को और नजदीक से जानेंगे तथा उसकी महिमा को भारतवर्ष तक पहुंचाएंगे।
- बस्तर प्रवास पर गृहमंत्री मुरिया दरबार में होंगे शामिल
बता दें कि मुरिया दरबार का आयोजन 4 अक्टूबर को सिरहासार भवन में किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, प्रदेश मंत्रिमंडल के मंत्री, बस्तर संभाग के जनप्रतिनिधि और देश एवं प्रदेश के अन्य गणमान्य नेता उपस्थित रहेंगे।
राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब केंद्रीय गृहमंत्री बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में जनता की बात सीधे सुनेंगे। अमित शाह बस्तर दौरे पर 4 अक्टूबर को रहेंगे। इस दौरान मिशन 2026 के तहत नक्सल उन्मूलन अभियान पर भी विस्तृत चर्चा करेंगे।
- मुरिया दरबार की ऐतिहासिक परंपरा
मुरिया विद्रोह के पश्चात 8 मार्च 1876 से मुरिया दरबार की परंपरा प्रारंभ हुई। यह दरबार जनता और तत्कालीन राजा के बीच सीधे संवाद का प्रमुख माध्यम रहा। उस समय बस्तर के गाँवों के प्रमुख मांझी-चालकी अपनी समस्याएँ और सुझाव दरबार में रखकर तत्कालीन शासन से समाधान प्राप्त करते थे।
आज स्वतंत्र और लोकतांत्रिक भारत में मुरिया दरबार की परंपरा जनप्रतिनिधियों और लोकतांत्रिक पदों पर आसीन व्यक्तियों तक समस्याएँ पहुँचाने का माध्यम बनी हुई है। इस बार यह अवसर और भी विशेष होगा क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहली बार मुरिया दरबार में उपस्थित होकर मांझी चालकी द्वारा प्रस्तुत समस्याओं और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से सुनेंगे और उनकी गंभीरता को समझेंगे।
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