छठ महापर्व पर सुषमा प्रेम पटेल की कवितामय अर्पण, “सुषमा के स्नेहिल सृजन” में झलका आस्था भरा भाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल ने अपनी नवीन रचना “सुषमा के स्नेहिल सृजन” के माध्यम से छठ महापर्व की पवित्रता, श्रद्धा और सांस्कृतिक आभा को शब्दों में पिरोया है।
”सुषमा के स्नेहिल सृजन”
छठ पर्व
चार दिनों का पर्व है, अनुपम यह त्योहार।
अति पावन पूजन छठी, सूर्योदय आधार।।करे मनोरथ पूर्ण जग, अस्त भानु शुभ भोर।
खड़े सरित कर जोड़कर, अर्घ्य सूर्य मुख ओर।।’सुषमा’ सुंदर दृश्य है, प्रवाहिनी शुभ नीर।
आदिदेव आदित्य छवि, चमके जैसे हीर।।पूजन जल की धार से, सूर्यदेव भगवान।
प्रथम अर्घ्य दूँ आपको, कर तटिनी का ध्यान।।फेरा सप्त प्रदक्षिणा, सूर्य अर्घ्य का कार्य।
’सुषमा’ निष्ठा से करें, जन मानस के आर्य।।
_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल
“चार दिनों का पर्व है, अनुपम यह त्योहार…” से आरंभ होती यह कविता न केवल सूर्योपासना की महिमा का बखान करती है, बल्कि इसमें लोक आस्था, नारी शक्ति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
कवयित्री ने अपनी पंक्तियों – “खड़े सरित कर जोड़कर, अर्घ्य सूर्य मुख ओर…” के माध्यम से छठ व्रत की भावनात्मक गहराई और सामाजिक एकता का अद्भुत चित्र खींचा है।
छठ पर्व की इस रचना में ’सुषमा’ ने श्रद्धा और सौंदर्य का ऐसा संगम प्रस्तुत किया है, जो पाठकों को भाव-विभोर कर देता है।
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