हौसलों की उड़ान : “छू लो आसमान” पढ़िए कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल का प्रेरक सृजन

काव्य-प्रेमियों के लिए खास प्रस्तुति: ‘सुषमा के स्नेहिल सृजन’ में प्रेरणा का संदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ की कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल ने अपने सृजन-संग्रह “सुषमा के स्नेहिल सृजन” के अंतर्गत एक अत्यंत प्रेरणादायी रचना “छू लो आसमान” प्रस्तुत की है। यह कविता मनहरण घनाक्षरी छंद में रचित है, जो आत्मविश्वास, मेहनत और संकल्प का संदेश देते हुए पाठकों को लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
सुषमा के स्नेहिल सृजन
छंद – मनहरण घनाक्षरी
‘छू लो आसमान’
आसमान छू लो प्यारे, काम ऐसे करो सारे,
हौंसले को पंख मिले,
सलीके सँवार लो।
हथौड़े की चोट से ही, पत्थर पिघलते हैं,
विश्वास कसौटी पर,
श्रम को निखार लो।
थको नहीं आप कहीं, मंजिलें कठिन सही,
संकल्प का दीप जला,
लक्ष्य को पुकार लो।
‘सुषमा’ सम्बल रखो, सफलता स्वाद चखो,
नेक पथ चलकर,
जीवन सुधार लो।
_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल
कविता में बताया गया है कि आसमान छूने के लिए काम और हौसले को पंख देना जरूरी है और पत्थर भी हथौड़े की चोट से पिघल जाते हैं, यानी सतत प्रयास से असंभव भी संभव हो जाता है। रचना का भाव है – थकना नहीं, कठिनाइयों से डरना नहीं, बल्कि संकल्प का दीप जलाकर लक्ष्य को पुकारना चाहिए।
कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की यह कृति नई ऊर्जा, सकारात्मक सोच और जीवन को संवारने का सुंदर संदेश देती है, जो आज के युवाओं और संघर्षरत लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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