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बच्चों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे ‘सुषमा के स्नेहिल सृजन’, कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल ने बाल साहित्य में रचा सुंदर काव्य ‘संरक्षण का संकल्प’

सीजीटाइम्स डेस्क | रायपुर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से जुड़ीं साहित्यकार सुषमा प्रेम पटेल ने एक बार फिर बाल साहित्य के क्षेत्र में अपनी सृजनशीलता का परिचय दिया है। उनके ताज़ा काव्य संग्रह “सुषमा के स्नेहिल सृजन” के अंतर्गत रचित कविता “संरक्षण का संकल्प” बच्चों को पर्यावरण बचाने, नैतिक मूल्यों को अपनाने और मानव सेवा के लिए प्रेरित करती है।

सुषमा के स्नेहिल सृजन

बाल साहित्य

“संरक्षण का संकल्प”

आओ बच्चों वृक्ष लगाएँ।
जिससे शुद्ध हवा हम पाएँ।।
पक्षी गाते सुंदर गाना।
गाने में तुम साथ निभाना।।

मात-पिता का मान बढ़ाओ।
सेवा से तुम पुण्य कमाओ।।
नेक मार्ग पर बढ़ते जाना।
जीवन में तुम नाम कमाना।।

नैतिकता का पाठ पढ़ाती।
’सुषमा’ सुंदर सीख सिखाती।।
सच्चाई का दीप जलाना।
अंधकार को दूर भगाना।।

करना माँ वसुधा की सेवा।
तभी मिलेगी सच्ची मेवा।।
प्यासों को तुम नीर पिलाना।
भोजन भूखों को खिलाना।।

_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल
(रायपुर, छ.ग.)

कविता की शुरुआत में बच्चों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करते हुए कहा गया है – “आओ बच्चों वृक्ष लगाएँ, जिससे शुद्ध हवा हम पाएँ” – यह पंक्ति सीधे-सीधे बच्चों को प्रकृति से जुड़ने का संदेश देती है।

कविता का प्रत्येक पद बच्चों को संस्कार, नैतिकता और समाज सेवा का संदेश देता है।
“मात-पिता का मान बढ़ाओ, सेवा से तुम पुण्य कमाओ” जैसी पंक्तियाँ पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं।

विशेष बात यह है कि यह कविता सरल भाषा, लयबद्ध शैली और भावनात्मक गहराई से ओत-प्रोत है, जिससे यह बच्चों के मन में सीधे उतरती है।
कवयित्री सुषमा जी का यह प्रयास न केवल साहित्यिक है, बल्कि समाज को संस्कारित करने की दिशा में भी एक प्रभावशाली कदम है।

सुषमा प्रेम पटेल कहती हैं कि बाल साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बच्चों को अच्छे संस्कार देने का एक सशक्त माध्यम है। यदि हम छोटी उम्र में ही बच्चों को पर्यावरण और सेवा की शिक्षा दें, तो एक सुंदर और सजीव भविष्य की कल्पना संभव है।

“सुषमा के स्नेहिल सृजन” जैसे रचनात्मक प्रयास नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने वाले हैं। यह कविता स्कूलों, बाल मंचों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति के लिए उपयुक्त है।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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