साहित्य सृजन

‘सुषमा के स्नेहिल सृजन’ में छलका भक्ति भाव, मनहरण घनाक्षरी छंद में गूँजा ‘राम भक्त हनुमान जी’ का स्तवन

कविता के माध्यम से प्रभु श्रीराम की भक्ति को समर्पित कर रही हैं कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्रतिभावान कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की नवीन रचना “राम भक्त हनुमान” इन दिनों साहित्य प्रेमियों और भक्ति रस में डूबे पाठकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मनहरण घनाक्षरी छंद में लिखी गई यह कविता न केवल छंद सौंदर्य का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि इसकी हर पंक्ति में प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के प्रति अगाध श्रद्धा और भक्ति का भाव भी झलकता है।

सुषमा के स्नेहिल सृजन”

छंद – मनहरण घनाक्षर

“राम भक्त हनुमान”

राम-राम मुख नाम, बसे प्रभु आठों याम,
ऐसे हनुमान जी के,
साथ रघुनाथ हैं।

अलौकिक तेज पुंज, राम-राम की है गूंज,
चरणों में राम जी के,
झुके सदा माथ हैं।

‘सुषमा’ सुभग काम, शुरू करो लेके नाम,
नेक राह चलो प्राणी,
जानकी जी साथ हैं।

ईर्ष्या द्वेष तज कर, श्रद्धा भाव हिय भर,
सत्य मार्ग अपनाना,
आपके ही हाथ हैं।

_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल

कविता में जहां “राम-राम मुख नाम, बसे प्रभु आठों याम” जैसे भावों से हनुमान जी की उपासना प्रकट होती है, वहीं “जानकी जी साथ हैं” और “आपके ही हाथ हैं” जैसे पंक्तियाँ मनुष्य को सत्य पथ पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

सुषमा जी की यह कविता यह दर्शाती है कि कैसे परंपरागत छंद शिल्प और आध्यात्मिक भावनाओं को मिलाकर रचना को जनमानस तक प्रभावशाली ढंग से पहुँचाया जा सकता है।
यह सृजन न केवल साहित्यिक सौंदर्य से परिपूर्ण है, बल्कि भक्ति और नैतिक शिक्षा का अनुपम संगम भी है।
ऐसी रचनाएँ आज के समय में समाज को नई दिशा और आंतरिक शांति प्रदान करने का माध्यम बन रही हैं।

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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