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नशे से मुक्ति की अलंकृत पुकार : कवयित्री ‘सुषमा प्रेम पटेल’ की मनहरण घनाक्षरी रचना ने जगाई नई चेतना

रायपुर। साहित्य समाज का दर्पण होता है और जब यह दर्पण सामाजिक बुराइयों पर प्रकाश डालता है, तो बदलाव की दिशा तय करता है। राजधानी रायपुर की वरिष्ठ कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल ने अपनी नवीनतम रचना “नशामुक्ति” में पूर्वाक्षरी अलंकार से सजी मनहरण घनाक्षरी छंद के माध्यम से समाज को एक प्रेरणादायी संदेश दिया है।

शराब, तंबाकू, गांजा और अन्य मादक द्रव्यों की बढ़ती लत से त्रस्त समाज को संबोधित करते हुए कवयित्री ने बड़ी ही सौम्यता और शक्ति के साथ नशे के विनाशकारी प्रभाव को उजागर किया है। हर अंतरे में “नशा” शब्द से शुरू होकर, यह रचना पाठकों को सोचने पर मजबूर करती है।

“सुषमा के स्नेहिल सृजन”

छंद – (पूर्वाक्षरी अलंकृत) मनहरण घनाक्षरी

नशामुक्ति

नशा नशे में क्यों चूर, होते हो क्यों मजबूर,
लत है विनाशकारी,
आकृष्ट न होइए।

नशा करे नुक़सान, चिलम व धूम्रपान,
सेवन मादक द्रव्य,
होश मत खोइए।

नशा एक बीमारी है, भगाना ज़िम्मेदारी है,
परिवार कलह का,
बीज मत बोइए।

नशा मुक्ति अभियान, ‘सुषमा’ शोभित ज्ञान,
अनमोल जीवन में,
सुकून से सोइए।

_कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल

सिर्फ शब्दों का सौंदर्य नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपा सामाजिक उद्देश्य ही इस रचना को खास बनाता है। नशा केवल व्यक्ति का नहीं, पूरे परिवार और समाज का विनाश कर सकता है। इस चेतावनी के साथ कवयित्री सुषमा ने नशामुक्त जीवन को अपनाने का आव्हान किया है।

उनकी पंक्तियाँ न सिर्फ कवि-हृदय की भावनाओं को दर्शाती हैं, बल्कि पाठकों को भीतर तक झकझोर देती हैं।
साहित्य के माध्यम से जागरूकता फैलाने की यह पहल वास्तव में सराहनीय है और ऐसे ही प्रयास नशामुक्त समाज की ओर एक ठोस कदम हैं।
“सुषमा के स्नेहिल सृजन” के माध्यम से प्रस्तुत यह कविता हर वर्ग को प्रेरित करती है कि “नशे से नाता तोड़िए, जीवन से नाता जोड़िए।”

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दिनेश के.जी. (संपादक)

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