नारायण साहित्य शाला उत्तर प्रदेश की “नव सृजन काल” साहित्यिक प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल रहीं श्रेष्ठ रचनाकार

रायपुर। नारायण साहित्य शाला उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित “नव सृजन काल” साहित्यिक प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की प्रख्यात कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की रचना “किताबों से मित्रता” को श्रेष्ठ रचना घोषित किया गया।
मनहरण घनाक्षरी छंद में लिखी गई इस कृति में लेखिका ने किताबों को जीवन का सच्चा मित्र बताया है। उन्होंने उल्लेख किया है कि किताबें न केवल ज्ञान का भंडार हैं, बल्कि स्वतंत्र चिंतन और स्वस्थ जीवन-दर्शन के निर्माण में भी सहायक हैं।
समीक्षक अक्षय राज शर्मा (भिवानी, हरियाणा) ने कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल की रचना की सराहना करते हुए कहा कि कवयित्री ने सामयिक विषय को छंदबद्ध और रोचक शैली में प्रस्तुत कर पाठकों के हृदय को छू लिया है। यह रचना आने वाली पीढ़ी को स्वाध्याय के महत्व का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अध्ययन के नाम पर केवल निर्धारित पाठ्यक्रम तक ही सीमित होकर रह गयी है। माना शैक्षणिक-स्तर पर वह महत्वपूर्ण है लेकिन सबकुछ नहीं है। स्वाध्याय के लिए पाठ्यक्रम से इतर वे पुस्तकें भी पढ़ना आवश्यक है जो एक स्वस्थ जीवन-दर्शन के लिए अत्यावश्यक है। जब किताबें अस्तित्व में नहीं थीं, तब भी गुरु द्वारा प्रदत्त श्रुति- स्मृतियों के अतिरिक्त ‘जनश्रुतियाँ’ भी प्रचलित थीं जिससे छात्रों को अपने जीवन निर्माण में सहायता मिलती थी। साहित्य-संवर्धन हुआ तो उसके संरक्षण के लिए लिखित साहित्य अस्तित्व में आया, ताड-पत्रों, शिलालेखों से होता हुआ आज पुस्तकों में बदल गया। ये पुस्तकें मूक होकर भी एक सच्चे मित्र की भांति सभी का आजीवन साथ निभाती हैं।
अब जबकि ऑडियो ई-बुक्स भी हैं तो न केवल छात्र बल्कि हर-एक के लिए स्वतंत्र-चिंतन विकसित करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर पटल के सभी सदस्यों ने कवियित्री सुषमा प्रेम पटेल को शुभकामनाएँ और आशीर्वाद प्रदान किया।
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